787> || एक भाबना ||++সফলতা,कड़वा सच |---(1--3)

 


  787> || एक भाबना ||

                 <--©--आद्यनाथ--->

कभी कोई कार्य मे ना नेही बोलना,

कोई अच्छे कार्य मे इंकार नेही करना,

किउंकि ऐसा कोई कर्म नेही हैं

जो आपसे नेही होंगे।

आपको मालूम होना चाहिये-----

आपभी ईश्वर का एक अंश हैं।

आपके अंदर सर्ब शोक्तिमान ईश्वर हैं।

तो आपभी सर्ब शक्तिमान हैं।

इस सत्य को जब अनुभब कर पाओंगे

तभी आप आपने आपको जान जाओंगे।

ईश्वर एक एबं अद्वितीय,

आप ईश्वर काही एक रुपहैं।

ईश्वर का प्रतिनिधित्त्व करनेकेलिएही

आपका जन्म हूया हैं।

एहि चिर सत्य, इसे भूलना नेही हैं।

इह भुलनेसेही जीवन बृथा।

कर्म ही धर्म,कर्म करते जाओ।

शुभचिन्ता और  कर्मनिष्ठा

दिलाएंगे आपका प्रतिष्ठा।

यहभी याद रखना जरूरी हैं----

अगर,जीबन में चलते चकते कभी

एक दरवाजा बंध होजाते हैं,

तो ईश्वर दूसरा दरवाजा खोल देते हैं।

यह दूसरा दरवाजा आप पा सकते हैं, 

अगर आपका स्थिर बिश्वाश और निष्ठा हैं।

अतः शुभ कर्म पथे शुभ कर्म करना ही

मनुष्य धर्म।


यह मेरा आपना एक भाबना,

जो मै जिबनमे अपनाया,

और अनमोल उपलोब्धि पाया।

हिमालय की चोटी छुं पाया,

आपना चाहत पूरा कर पाया।

इसलिये ही आपको मेरा भावना जताया।

=====<--©--आद्यनाथ--->=====

   2> ||  সফলতা  ||

             <--©➽--আদ্যনাথ-->

সফলতার ফুল থেকে

যখন বিনম্রতার সুগন্ধ ছড়ায়।

তখন পরিবেশের মৃদু মন্দ বাতাস

সকলের মনে ভরে দেয় এক অফুরন্ত আনন্দের আবেশ।

সাথে বেজে ওঠে হৃদয় বীণার এক সু-মধুর তান।

যে তানের রেশে জেগে ওঠে সহস্র মনের

এক মিলনের ঐকতান।

আর সার্থক হয় সেই সফলতা।

---------<--©➽--আদ্যনাথ-->-------------

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        3> || कड़वा सच ||

               <--©➽---आद्यनाथ--->

बगीचामें जब सफलताके गुलाब खिलते हैं,

तब विनम्रता का खुसबू से चारों और सुगंधित

हो जाते हैं।

बागवान के मनमें आनंद खिलने लगते हैं।

और पोरिबेश भी नये ख्वाब देखने लगते हैं।


इस संसार केबल बागवान के बगीचा मात्र।

बगीचा में जब अच्छा फूल फल उपजते हैं 

तब बागवान खुश होते हैं,उन की  मनमें आनंद खिल ते हैं। 

मगर फल फूल में कीड़ा लगनेसे बागवान दुःखी

होते हैं। बगीचाके परिबेश दूषित हो जाती हैं।

तब मालूम होते हैं, दूषित बगीचा से ऊसर तथा बंजर भूमि अच्छे हैं।

----------- <--©➽---आद्यनाथ--->-----------

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